Darbar Mila Mujhko He Maat Tumhara Hai/दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है। तर्ज–होंठों से छू लो तुम।


दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
ये कर्म नहीं मेरा एहसान तुम्हारा है,
ये कर्म नहीं मेरा एहसान तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

कल कितनी गरीबी थी, अब रोज दीवाली है,
कल कितनी गरीबी थी, अब रोज दीवाली है,
किस्मत ये नहीं मेरी वरदान तुम्हारा है,
किस्मत ये नहीं मेरी वरदान तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

ठुकराने वालों ने पलकों पे बिठाया है,
ठुकराने वालों ने पलकों पे बिठाया है,
ये शान नहीं मेरी सम्मान तुम्हारा है,
ये शान नहीं मेरी सम्मान तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

एक वक्त के मारे ने किस्मत को हरा डाला,
एक वक्त के मारे ने किस्मत को हरा डाला,
औकात नहीं मेरी ये काम तुम्हारा है,
औकात नहीं मेरी ये काम तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

निर्बल को अपनाना निर्धन के घर जाना,
निर्बल को अपनाना निर्धन के घर जाना,
ये शौक नहीं मेरा ये विधान तुम्हारा है,
ये शौक नहीं मेरा ये विधान तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

रोते को हंसाती हो गिरते को उठाती हो,
रोते को हंसाती हो गिरते को उठाती हो,
भक्तों ने माना तुम्हे बड़ा नाम तुम्हारा है,
भक्तों ने माना तुम्हे बड़ा नाम तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
ये कर्म नहीं मेरा एहसान तुम्हारा है,
ये कर्म नहीं मेरा एहसान तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है,
दरबार मिला मुझको हे मात तुम्हारा है।।

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