Puche Babul Se Ro Ro Ke Beti Khadi/पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी।


पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
सारा परिवार है सगे सम्बन्धी हैं,
सारा परिवार है सगे सम्बन्धी हैं,
केवल मेरा ही घर में गुजारा नहीं,
केवल मेरा ही घर में गुजारा नहीं,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं।।

बातें सुनकर बेटी की पिता रो पड़े,
बातें सुनकर बेटी की पिता रो पड़े,
कुछ ना बोले मगर सोचते रह गये,
कुछ ना बोले मगर सोचते रह गये,
बेटी तू है अमानत किसी और की,
बेटी तू है अमानत किसी और की,
इसी कारण इस घर में गुजारा नहीं,
इसी कारण इस घर में गुजारा नहीं,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं।।

शादी बन्धन की ऐसी बनी रीत है,
शादी बन्धन की ऐसी बनी रीत है,
दूसरे घर में बेटी को जाना पड़े,
दूसरे घर में बेटी को जाना पड़े,
ब्याह जिससे रचा उसका घर हो तेरा,
ब्याह जिससे रचा उसका घर हो तेरा,
कौन कहता है तेरा ठिकाना नहीं,
कौन कहता है तेरा ठिकाना नहीं,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं।।

छोड़ बाबुल का घर आई मम्मी तेरी,
छोड़ बाबुल का घर आई मम्मी तेरी,
उसके घर में नहीं थी कोई कमी,
उसके घर में नहीं थी कोई कमी,
दादी आईं तेरी, चाची आईं तेरी,
दादी आईं तेरी, चाची आईं तेरी,
बाबुल का घर बेटी का ठिकाना नहीं,
बाबुल का घर बेटी का ठिकाना नहीं,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
पूछे बाबुल से रो रो के बेटी खड़ी,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं,
तेरे घर में मेरा क्यों गुजारा नहीं।।


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