Sri krishna Ki Kahani

 Krishna ji ka prithwi par aagman.

द्वापर युग की बात है जब धरती पर पाप बहुत बढ़ गए तो सभी देवता अपनी समस्या लेकर भगवान विष्णु जी के पास गए। भगवान विष्णु जी ने उनकी समस्या सुनी और उन्हे आश्वासन देते हुए कहा कि आप लोग चिंता ना करें मैं जल्द ही नर अवतार लेकर धरती पर आऊंगा और इसे पापों से मुक्ति दिलाऊंगा। भगवान विष्णु जी ने कहा कि मेरे अवतार लेने से पहले कश्यप ऋषि मथुरा के यदुकुल में जन्म लेकर वसुदेव के नाम से प्रसिद्ध होंगे। उनकी दूसरी पत्नी के गर्भ से मेरी सवारी शेषनाग बलराम के रूप जन्म लेंगे। और उनकी पहली पत्नी देवकी के गर्भ से मैं कृष्ण के रूप में जन्म लूंगा। भगवान विष्णु जी बोले कि मैं कुरुक्षेत्र में पापी क्षत्रियों का संहार कर के धरती को पाप के बोझ से मुक्त कराऊंगा। वह समय भी जल्द ही आ गया। मथुरा में ययाति वंश के राजा उग्रसेन का राज्य था। कंस राजा उग्रसेन का सबसे बड़ा पुत्र था। देवकी का जन्म उन्हीं के यहां हुआ था। देवकी कंस की चचेरी बहन थी। इधर कश्यप ऋषि का जन्म राजा शूरसेन के पुत्र वसुदेव के रूप में हुआ और आगे चलकर देवकी का विवाह वसुदेव के साथ संपन्न हुआ।

कंस अपनी बहन देवकी को बहुत प्यार करता था। परंतु जब देवकी विदा हो रही थी तब ये आकाशवाणी हुई कि कंस देवकी का आठवां पुत्र तुम्हारा काल होगा। तुम्हारी मृत्यु उसी के हाथों से होगी उसी दिन से कंस देवकी को मारने के लिए उद्धत हो गया। उसने वसुदेव और देवकी को विदा करने के बजाय कारागार में डाल दिया। इस घटना से चारों तरफ हाहाकार मच गया, अनेक योद्धा वसुदेव का साथ देने के लिए तैयार हो गए परंतु वसुदेव युद्ध नहीं चाहते थे। अतः उन्होंने कंस को यह विश्वास दिलाया कि मैं देवकी के सारे बच्चों को जन्म लेते ही तुम्हे सौंप दूंगा। वसुदेव कभी भी झूठ नहीं बोलते थे इसी कारण कंस को उनकी बात पर विश्वास हो गया।



देवकी ने जैसे जैसे बच्चों को जन्म दिया वसुदेव ने उनको कंस के हवाले कर दिया और कंस ने उन्हे चट्टान पर पटक कर मार डाला। उसके बाद भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में श्री कृष्ण ने जन्म लिया।


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